उत्तराखंड ने अपने लोकप्रिय जननेता को दी अंतिम विदाई, राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी
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Bhuvan Chandra Khanduri के निधन से उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर फैल गई। बुधवार 20 मई को देहरादून में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान और सैन्य परंपराओं के साथ किया गया। जैसे ही उनके निधन की खबर सामने आई, प्रदेशभर में राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य जगत से जुड़े लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया। उत्तराखंड ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिसने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सादगी, ईमानदारी और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

देहरादून स्थित उनके वसंत विहार आवास पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। आम नागरिकों से लेकर बड़े राजनीतिक नेताओं तक, हर कोई अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा। वातावरण पूरी तरह गमगीन दिखाई दिया। लोगों की आंखें नम थीं और हर व्यक्ति उन्हें अंतिम विदाई देते समय भावुक नजर आया।

उत्तराखंड ने अपने लोकप्रिय जननेता को दी अंतिम विदाई, राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुए मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी

उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी ने देश की सेवा सेना और राजनीति दोनों क्षेत्रों में पूरी निष्ठा के साथ की। वहीं राज्यपाल Gurmit Singh ने कहा कि खंडूरी जी अनुशासन और राष्ट्रसेवा की मिसाल थे। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति का एक मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उनके आवास के बाहर मौजूद रही। लोगों ने “खंडूरी जी अमर रहें” के नारों के साथ अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन संघर्ष, अनुशासन और सेवा का प्रतीक माना जाता है। भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने देश की सेवा की और बाद में राजनीति में आकर उत्तराखंड के विकास को नई दिशा देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया। उनके कार्यकाल में सड़क, शिक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

राजनीति में उनकी पहचान एक सख्त लेकिन ईमानदार नेता के रूप में रही। आम जनता के बीच उनकी छवि साफ-सुथरी और जनहित में फैसले लेने वाले नेता की थी। यही कारण रहा कि राजनीतिक विरोधी भी उनके व्यक्तित्व का सम्मान करते थे। उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें विकास और सुशासन का प्रतीक माना जाता रहा है।

आज दोपहर उनके पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया। इस दौरान हजारों लोग सड़क किनारे खड़े होकर उन्हें श्रद्धांजलि देते दिखाई दिए। पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।

अंतिम संस्कार के समय पुलिस बल द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सैन्य परंपराओं के अनुसार सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। पूरे वातावरण में शोक और सम्मान का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। जैसे ही उनकी चिता को मुखाग्नि दी गई, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

राज्य सरकार ने उनके सम्मान में शोक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। कई सरकारी भवनों पर झंडे झुके रहे और विभिन्न संस्थानों में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रदेशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कर उनके योगदान को याद किया।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में नैतिक मूल्यों और सादगी की पहचान थे। उनका पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने हमेशा राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर काम किया।

उत्तराखंड के लोगों के लिए उनका निधन एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। पहाड़ के विकास, सैनिकों के सम्मान और प्रशासनिक सुधारों के लिए किए गए उनके प्रयास लंबे समय तक याद किए जाएंगे। राज्य की राजनीति में उनकी जगह भर पाना आसान नहीं माना जा रहा।

आज जब उन्हें अंतिम विदाई दी गई, तब केवल एक नेता का अंतिम संस्कार नहीं हुआ, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति के एक ऐसे युग को विदाई दी गई जिसने ईमानदारी, अनुशासन और जनसेवा की अलग पहचान बनाई। मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का नाम उत्तराखंड के इतिहास में हमेशा सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता रहेगा।

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