उत्तराखंड में नई अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना, मदरसा बोर्ड समाप्त
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दैनिक प्रभातवाणी |देहरादून | 4 फरवरी 2026

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड स्टेट माइनॉरिटी एजुकेशन अथॉरिटी का गठन कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस नए प्राधिकरण के जरिए अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ा जाएगा, ताकि छात्र मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बन सकें।

सरकारी सूत्रों के अनुसार अब तक मदरसा बोर्ड के तहत संचालित संस्थानों में पाठ्यक्रम सीमित दायरे में था, जिससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि अब अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान और आधुनिक सिलेबस तैयार किया जाए, जिसमें सामान्य विषयों के साथ तकनीकी और व्यावहारिक शिक्षा को भी शामिल किया जाए।

नवगठित उत्तराखंड स्टेट माइनॉरिटी एजुकेशन अथॉरिटी को पाठ्यक्रम निर्धारण, शिक्षा संस्थानों को मान्यता देने और शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह प्राधिकरण सुनिश्चित करेगा कि अल्पसंख्यक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र भी गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर और भाषाओं जैसे विषयों में मजबूत आधार प्राप्त कर सकें।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया कदम है। सरकार का कहना है कि धार्मिक शिक्षा जारी रहेगी, लेकिन उसके साथ आधुनिक विषयों को जोड़कर छात्रों के भविष्य को अधिक सुरक्षित और उज्ज्वल बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि वे नई शिक्षा नीति के अनुरूप छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।

इस निर्णय के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ संगठनों ने इसे शिक्षा में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है, जबकि कुछ अल्पसंख्यक संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नई अथॉरिटी को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इससे अल्पसंख्यक छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह नया प्राधिकरण अपने उद्देश्यों को किस हद तक पूरा कर पाता है और इसका असर जमीनी स्तर पर कैसा रहता है।