फिटनेस सेवाएं बंद होने के विरोध में टैक्सी चालकों की हड़ताल, 50 हजार वाहन हो सकते हैं प्रभावित
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दैनिक प्रभातवाणी |हल्द्वानी | 4 फरवरी 2026

हल्द्वानी में फिटनेस प्रमाणन सेवाओं के बंद होने के विरोध में टैक्सी और व्यावसायिक वाहन चालकों ने 4 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। चालकों का कहना है कि फिटनेस सेंटर बंद होने से उनके वाहनों की वैधता पर संकट खड़ा हो गया है, जिससे न सिर्फ उनकी रोज़ी-रोटी प्रभावित हो रही है, बल्कि आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

टैक्सी यूनियन और वाहन चालक संगठनों के अनुसार हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 50,000 से अधिक टैक्सी, मैक्सी, ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहन संचालित होते हैं। फिटनेस प्रमाणपत्र समय पर न मिलने की स्थिति में इन वाहनों का संचालन अवैध माना जा सकता है, जिससे चालकों पर चालान और कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है। इसी को लेकर चालकों में गहरा रोष है।

चालकों का आरोप है कि लंबे समय से फिटनेस सेवाएं सुचारु रूप से संचालित नहीं हो रही हैं, जिसके बावजूद परिवहन विभाग की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और मांग उठाने के बाद भी प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया, जिसके चलते उन्हें हड़ताल जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हड़ताल के चलते हल्द्वानी के साथ-साथ नैनीताल, रुद्रपुर, काठगोदाम और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। टैक्सी सेवाएं ठप रहने से यात्रियों, छात्रों और मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत हो सकती है। विशेष रूप से रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर आने-जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

टैक्सी यूनियन नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक फिटनेस सेवाएं बहाल नहीं की जातीं और वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था सुचारु नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप करने और समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि परिवहन विभाग हालात पर नजर बनाए हुए है और चालकों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है।

फिलहाल हड़ताल के ऐलान से शहर में चिंता का माहौल है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो इसका सीधा असर आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और वाहन चालकों के बीच सहमति बन पाती है या नहीं।