Spread the loveदेहरादून (उत्तराखंड): उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय मोड में दिखाई दे रही है। प्रदेश में हर वर्ष बरसात के दौरान आने वाली आपदाओं और भूस्खलन जैसी घटनाओं से निपटने के लिए मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने बड़ा फैसला लेते हुए ₹130 करोड़ के राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि यह राशि मानसून शुरू होने से पहले राज्य की तैयारियों को मजबूत करने, संवेदनशील सड़कों की मरम्मत कराने और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए खर्च की जाएगी।प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में हर वर्ष मानसून भारी चुनौतियां लेकर आता है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क बंद होने, पुल क्षतिग्रस्त होने और कई गांवों का संपर्क टूटने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। खासकर Uttarakhand के पहाड़ी जिलों में आपदा का खतरा सबसे अधिक बना रहता है। इसी को देखते हुए सरकार ने इस बार पहले से तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाई जा सके।मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर साफ निर्देश दिए हैं कि सभी संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से मशीनरी और रेस्क्यू टीमों को तैयार रखा जाए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से चारधाम यात्रा मार्गों पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है, क्योंकि इन दिनों लाखों श्रद्धालु देवभूमि पहुंच रहे हैं।सरकार द्वारा जारी ₹130 करोड़ की राशि का उपयोग सड़क मरम्मत, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्य, राहत सामग्री की उपलब्धता और रेस्क्यू उपकरणों को मजबूत करने में किया जाएगा। प्रशासन का फोकस उन क्षेत्रों पर भी रहेगा जहां हर वर्ष बारिश के दौरान सड़कें धंसने और पहाड़ टूटने की घटनाएं सामने आती हैं। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में जेसीबी मशीनें और आपदा राहत दल पहले से तैनात किए जाएंगे ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।प्रदेश में चारधाम यात्रा भी इस समय अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। Kedarnath Temple समेत अन्य धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रा मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना है। हाल के दिनों में केदारनाथ घाटी में खराब मौसम और घने कोहरे के कारण हेली सेवाएं कई बार प्रभावित हुई हैं। कई उड़ानों को अस्थायी रूप से रोका गया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में भक्त पैदल यात्रा कर बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।इधर उत्तराखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश में संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा चल रही है कि मुख्यमंत्री धामी जल्द मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल कर सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन भाजपा संगठन और सरकार के भीतर लगातार बैठकों की खबरें राजनीतिक अटकलों को और हवा दे रही हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए सरकार संगठनात्मक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के जरिए कुछ क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा सकती है। वहीं विपक्ष भी सरकार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सड़क व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा हुआ है।प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि आने वाले सप्ताह उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। एक ओर मानसून की चुनौती सरकार के सामने खड़ी है तो दूसरी ओर चारधाम यात्रा के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रशासनिक दबाव बढ़ा रही है। इसी बीच राजनीतिक गतिविधियों ने भी प्रदेश का माहौल गर्म कर दिया है। सरकार प्रशासनिक तैयारियों और राजनीतिक संतुलन दोनों मोर्चों पर खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश में लगी हुई है। Post Views: 6 Post navigation यात्रा 2026: श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब, 10 लाख के करीब पहुँचा आंकड़ा, केदारनाथ में सबसे अधिक भीड़ चमोली में भारी लैंडस्लाइड से नीति-मलारी हाईवे बंद, कई गांवों का संपर्क टूटा, प्रशासन अलर्ट