कर्णप्रयाग विवाद में गिरफ्तार चारों निहंग सिखों को सशर्त जमानत, मामले की गहन जांच में जुटी एसआईटी
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दैनिक प्रभातवाणी, देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुए निहंग सिख विवाद और पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में सामने आए रोड-रेज प्रकरण ने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। दोनों मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक ओर कर्णप्रयाग विवाद में गिरफ्तार चार निहंग सिखों को गोपेश्वर जिला न्यायालय से जमानत मिल गई है, वहीं दूसरी ओर श्रीनगर में सड़क पर हुए विवाद के मामले में राजस्थान के दस पर्यटकों को हिरासत में लिया गया है।

कर्णप्रयाग में 16 जून को एक स्थानीय युवक और निहंग सिखों के बीच पार्किंग को लेकर कहासुनी हुई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामूली विवाद कुछ ही देर में तीखी बहस और फिर झड़प में बदल गया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

मामले की सुनवाई के बाद गोपेश्वर जिला न्यायालय ने चारों आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी। जेल से रिहा होने के बाद चारों निहंग सिख हिमाचल प्रदेश स्थित पांवटा साहिब गुरुद्वारे पहुंचे, जहां उन्होंने मत्था टेककर अरदास की और शांति एवं न्याय की प्रार्थना की। इस बीच घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

चमोली पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की जांच करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री साझा करने से बचने की अपील की गई है।

उधर, पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थानीय युवकों और राजस्थान से आए पर्यटकों के बीच मामूली वाहन टक्कर के बाद विवाद खड़ा हो गया। शुरुआती बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई और सड़क पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद कानून हाथ में लेने और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप में राजस्थान के दस पर्यटकों को हिरासत में लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही घटना में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

दोनों घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि छोटी-छोटी कहासुनी और सड़क पर होने वाले विवाद किस प्रकार अचानक गंभीर रूप ले सकते हैं। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों और पर्यटकों से संयम बनाए रखने, विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में न लेने और तत्काल पुलिस सहायता लेने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

 

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