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Kashipur स्थित तुमड़िया डैम की खराब होती स्थिति ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सिंचाई व्यवस्था की प्रमुख लाइफलाइन माने जाने वाले इस डैम की हालत अब लगातार जर्जर होती बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डैम की संरचना में कई स्थानों पर क्षति और रखरखाव की कमी के संकेत मिले हैं, जिससे भविष्य में बड़े सिंचाई संकट की आशंका जताई जा रही है।

तुमड़िया डैम का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यह बांध उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों की खेती के लिए पानी उपलब्ध कराता है। बताया जा रहा है कि करीब 28 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई इसी डैम के पानी पर निर्भर है। ऐसे में यदि डैम की स्थिति और खराब होती है तो इसका सीधा असर दोनों राज्यों की कृषि व्यवस्था पर पड़ सकता है।

किसानों की बढ़ी चिंता

Udham Singh Nagar जिले के किसानों का कहना है कि पिछले कुछ समय से डैम की हालत को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। उनका आरोप है कि समय रहते मरम्मत और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। किसानों का कहना है कि यदि बरसात के मौसम में डैम पर अतिरिक्त दबाव पड़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

क्षेत्र के कई किसान धान, गन्ना और अन्य फसलों की खेती के लिए पूरी तरह सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर हैं। गर्मियों के मौसम में पानी की मांग बढ़ जाती है और ऐसे समय में यदि डैम की क्षमता प्रभावित होती है तो फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

यूपी और उत्तराखंड दोनों के लिए महत्वपूर्ण

तुमड़िया डैम केवल उत्तराखंड के लिए ही नहीं बल्कि पड़ोसी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सिंचाई विभाग के अनुसार इस डैम से निकलने वाली नहरों के जरिए दोनों राज्यों की बड़ी कृषि भूमि तक पानी पहुंचता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डैम में तकनीकी समस्या बढ़ती है या जल भंडारण क्षमता प्रभावित होती है तो इसका असर खाद्य उत्पादन पर भी दिखाई दे सकता है। खासतौर पर गर्मी और मानसून के बीच का समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

डैम की संरचना पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि लंबे समय से डैम के रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई स्थानों पर दरारें, कटाव और जर्जर संरचना की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि संबंधित विभाग समय-समय पर निरीक्षण की बात करता रहा है, लेकिन अब हालात को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार पुराने बांधों की नियमित तकनीकी जांच बेहद जरूरी होती है। यदि समय पर मरम्मत नहीं की जाए तो बरसात और अधिक जल दबाव के दौरान खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि स्थानीय लोग अब सरकार और प्रशासन से तत्काल व्यापक मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

सिंचाई संकट का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर

यदि डैम की स्थिति के कारण सिंचाई प्रभावित होती है तो इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। फसल उत्पादन कम होने से किसानों की आय प्रभावित होगी, जिसका असर स्थानीय व्यापार और रोजगार पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में खेती पहले ही मौसम परिवर्तन और पानी की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में सिंचाई व्यवस्था कमजोर होने से स्थिति और कठिन हो सकती है।

मानसून से पहले बढ़ी चिंता

मौसम विभाग पहले ही इस बार मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जता चुका है। ऐसे में यदि डैम की संरचना मजबूत नहीं रही तो अतिरिक्त जल दबाव से खतरा बढ़ सकता है।

स्थानीय निवासी चाहते हैं कि मानसून शुरू होने से पहले डैम का विस्तृत तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और जिन हिस्सों में कमजोरी है वहां तत्काल मरम्मत की जाए। लोगों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या पैदा कर सकता है।

प्रशासन और विभाग की नजर

सिंचाई विभाग और प्रशासन की ओर से डैम की स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर निरीक्षण किया जा रहा है और आवश्यक तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि तेजी से ठोस कार्यवाही की जरूरत है। किसानों ने मांग की है कि डैम की मरम्मत और मजबूतीकरण के लिए विशेष बजट जारी किया जाए।

जल संरक्षण और भविष्य की चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में पानी और सिंचाई सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ती गर्मी के कारण जल स्रोतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने बांधों और सिंचाई परियोजनाओं का सुरक्षित और मजबूत रहना बेहद जरूरी है।

तुमड़िया डैम की स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं का रखरखाव पर्याप्त स्तर पर हो रहा है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इसका असर लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

काशीपुर स्थित तुमड़िया डैम की खराब होती स्थिति केवल एक तकनीकी समस्या नहीं बल्कि कृषि, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनती जा रही है। 28 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई इस डैम पर निर्भर बताई जा रही है, ऐसे में इसकी सुरक्षा और मजबूती बेहद जरूरी हो गई है।

किसानों और स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कदम उठाएंगे ताकि भविष्य में किसी बड़े संकट से बचा जा सके।

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