धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी
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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई धामी मंत्रिमंडल की बैठक में पर्वतीय क्षेत्रों के आर्थिक विकास और पलायन रोकने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने “उत्तराखण्ड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” को मंजूरी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य पहाड़ों में बिखरी हुई छोटी कृषि जोतों को एकत्रित कर खेती और बागवानी को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों की आय बढ़ सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह नीति प्रदेश के 11 पर्वतीय जनपदों में लागू की जाएगी। इसमें हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर को शामिल नहीं किया गया है। योजना के तहत प्रत्येक पर्वतीय जिले में हर वर्ष पांच गांवों में चकबंदी का कार्य किया जाएगा। इस प्रकार अगले पांच वर्षों में कुल 275 गांवों को इस योजना के दायरे में लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

नीति के तहत यदि किसी राजस्व ग्राम में 50 प्रतिशत या उससे अधिक काश्तकार चकबंदी के पक्ष में सहमति देते हैं, तो वहां अनिवार्य चकबंदी लागू की जा सकेगी। इसके अलावा जिन गांवों में किसान आपसी सहमति से अपनी जमीनों का एकीकरण करना चाहते हैं, वहां कम से कम 10 खातेदारों की सहमति से स्वैच्छिक या आंशिक चकबंदी शुरू की जा सकेगी।

सरकार का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी और बिखरी हुई जोतें खेती को लाभकारी बनने से रोकती हैं। कई स्थानों पर किसानों की जमीन अलग-अलग हिस्सों में बंटी होने के कारण आधुनिक खेती, सिंचाई और बागवानी योजनाओं को लागू करने में कठिनाई आती है। नई नीति के माध्यम से इन समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।

चकबंदी प्रक्रिया को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक चयनित गांव में ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में चकबंदी समिति गठित की जाएगी। यह समिति भूमि से संबंधित विवादों और आपत्तियों का निस्तारण करेगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि जमीन से जुड़ी सभी आपत्तियों का समाधान अधिकतम 120 दिनों के भीतर किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया लंबी न खिंचे।

नीति में आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है। भूमि सर्वे और पैमाइश के लिए ड्रोन और आधुनिक सर्वे तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे भूमि मापन में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे।

राज्य सरकार का मानना है कि इस नीति से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि और बागवानी को नई गति मिलेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने से पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नीति का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया तो यह पहाड़ों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है।

कैबिनेट बैठक में इस नीति के अलावा अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा और निर्णय लिए गए। सरकार की ओर से कहा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आने वाले समय में भी इसी प्रकार की योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

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