Spread the loveनैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा बार-बार समय मांगने पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्धन को 24 घंटे के भीतर प्रगति रिपोर्ट और अंतिम जवाब पेश करने का सख्त आदेश दिया है।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि पूर्व में दिए गए आदेशों का अब तक पालन क्यों नहीं हुआ, इस पर सरकार को जवाब देना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकायुक्त जैसी महत्वपूर्ण संस्था को लंबे समय तक खाली रखना गंभीर विषय है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह तत्काल स्थिति स्पष्ट करते हुए विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को निर्धारित की गई है।यह मामला हल्द्वानी के गौलापार निवासी रविशंकर जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा है। याचिका में कहा गया है कि राज्य में लंबे समय से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद संस्थान के नाम पर हर वर्ष लगभग दो से तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्तमान समय में राज्य की विभिन्न जांच एजेंसियां, जिनमें विजिलेंस जैसी एजेंसियां भी शामिल हैं, सीधे सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय के नियंत्रण में कार्य कर रही हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि बिना शासन की अनुमति के किसी भी राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने का अधिकार किसी स्वतंत्र एजेंसी के पास नहीं है। ऐसे में भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि 3 अप्रैल को प्रस्तावित सर्च कमेटी की बैठक कोरम पूरा नहीं होने के कारण नहीं हो पाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने गहरी असंतुष्टि व्यक्त की। अदालत ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले में इस प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।खंडपीठ ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि सरकार समयबद्ध तरीके से कार्रवाई नहीं करती है तो अदालत इस मामले में और सख्त रुख अपना सकती है। कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह मामला प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की यह सख्ती राज्य सरकार पर लोकायुक्त नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ाएगी। अब सभी की नजर 15 मई को होने वाली अगली सुनवाई और सरकार द्वारा पेश की जाने वाली प्रगति रिपोर्ट पर टिकी हुई है। Post Views: 20 Post navigationसोने पर बढ़े आयात शुल्क के खिलाफ सर्राफा व्यापारियों का विरोध, 14 मई को पूरे उत्तराखंड में होगा सांकेतिक प्रदर्शन धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी