Spread the love देहरादून : उत्तराखंड में सोने पर बढ़ाए गए आयात शुल्क को लेकर सर्राफा व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रदेशभर के व्यापारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों और सोने पर लगातार बढ़ रहे आयात शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ते आयात शुल्क ने सर्राफा कारोबार की स्थिति को प्रभावित कर दिया है, जिससे न केवल व्यापारियों बल्कि आम ग्राहकों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर अब सर्राफा कारोबारी 14 मई की शाम पूरे उत्तराखंड में सांकेतिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े सर्राफा व्यापारियों ने 13 मई को बैठक आयोजित कर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में व्यापारियों ने कहा कि पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ सरकार द्वारा आयात शुल्क में बढ़ोतरी का असर सीधे बाजार पर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क के कारण सोने के आभूषणों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो रही है और कारोबार में गिरावट देखी जा रही है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 14 मई की शाम प्रदेशभर में सर्राफा कारोबारी मोमबत्ती जलाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। राजधानी देहरादून के धामावाला बाजार सहित कई प्रमुख बाजारों में व्यापारी एकत्र होकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करेंगे। इसके अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, हल्द्वानी, रुड़की, श्रीनगर, अल्मोड़ा और अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के सांकेतिक प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि सोने पर बढ़ाया गया आयात शुल्क सीधे तौर पर सर्राफा व्यापार को प्रभावित कर रहा है। उनका मानना है कि जब सोने की कीमतें अत्यधिक बढ़ती हैं तो आम लोग आभूषण खरीदने से बचते हैं। इसका असर छोटे व्यापारियों, कारीगरों और आभूषण निर्माण से जुड़े हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी पड़ता है। व्यापारियों ने चिंता जताई कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में छोटे स्तर के कई सर्राफा कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सर्राफा व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि त्योहारों और शादियों के सीजन में सामान्य रूप से सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक अब सीमित खरीदारी कर रहे हैं। कई ग्राहक हल्के वजन के आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग खरीदारी को टाल भी रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में मंदी का असर साफ दिखाई देने लगा है। व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार को सर्राफा कारोबारियों की समस्याओं को गंभीरता से समझना चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल व्यापारियों का मुद्दा नहीं है बल्कि इससे जुड़े लाखों परिवारों की आजीविका भी प्रभावित होती है। उत्तराखंड सहित देशभर में बड़ी संख्या में कारीगर, सुनार और छोटे व्यापारी इस उद्योग पर निर्भर हैं। यदि कारोबार कमजोर होगा तो इसका असर रोजगार पर भी पड़ेगा। व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। मोमबत्ती जलाकर किए जाने वाले प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि वे किसी प्रकार का बाजार बंद या उग्र आंदोलन नहीं करना चाहते, बल्कि सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि सरकार यदि आयात शुल्क में राहत देती है तो इससे बाजार में स्थिरता आएगी और ग्राहकों को भी राहत मिलेगी। व्यापारियों के अनुसार, सोने की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि का असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर सबसे अधिक पड़ता है, क्योंकि भारतीय समाज में विवाह और पारिवारिक आयोजनों में सोने का विशेष महत्व माना जाता है। उधर, आम ग्राहकों का भी कहना है कि पिछले कुछ समय में सोने की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, जिससे खरीदारी करना कठिन हो गया है। कई परिवार अब अपने बजट के अनुसार कम मात्रा में आभूषण खरीद रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही तो आने वाले महीनों में सर्राफा कारोबार और प्रभावित हो सकता है। प्रदेशभर के व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि सर्राफा उद्योग को राहत देने के लिए आयात शुल्क पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही व्यापारियों से जुड़े नियमों और नीतियों को सरल बनाया जाए ताकि कारोबार प्रभावित न हो। व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। 14 मई को होने वाले सांकेतिक प्रदर्शन को लेकर विभिन्न बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। व्यापारियों का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल एक दिन का विरोध नहीं बल्कि सरकार तक व्यापारियों की वास्तविक समस्याओं को पहुंचाने का प्रयास है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस विरोध और व्यापारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है। Post Views: 4 Post navigation टिहरी पुलिस की तत्परता से टला बड़ा हादसा, मॉरीशस से आए चारधाम यात्रियों की बचाई जान लोकायुक्त नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव को 24 घंटे में जवाब दाखिल करने का आदेश