Spread the loveटिहरी गढ़वाल। प्रशासनिक रोक-टोक, पुलिस की सख्ती और तीन दिनों तक चले राजनीतिक गतिरोध के बाद आखिरकार भीम आर्मी प्रमुख, नगीना सांसद और Chandrashekhar Azad टिहरी गढ़वाल के देवल गांव पहुंचे, जहां उन्होंने मृतक दलित युवक केतन लाल के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की पैनी नजर बनी रही। देवल गांव पहुंचने के बाद चंद्रशेखर आजाद सीधे केतन लाल के घर पहुंचे। उन्होंने मृतक की मां और अन्य परिजनों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनी। मुलाकात के दौरान परिजनों का दर्द छलक पड़ा और घर का माहौल भावुक हो गया। चंद्रशेखर ने परिवार को भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में वे उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और उन्हें कानूनी, सामाजिक तथा राजनीतिक स्तर पर हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी। परिजनों से बातचीत के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने देहरादून और हरिद्वार में पुलिस द्वारा उनके काफिले को रोके जाने और कथित दुर्व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सांसद और जनप्रतिनिधि को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया है और इस पूरे घटनाक्रम को वे गंभीरता से राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि दिल्ली लौटने के बाद वे केतन लाल हत्याकांड और अपने साथ हुई कथित प्रशासनिक कार्रवाई के मुद्दे को सीधे संसद में उठाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को संसद की विशेषाधिकार समिति के समक्ष भी ले जाया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक सांसद के अधिकारों और दायित्वों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया गया। उन्होंने केतन लाल के परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पीड़ित परिवार वर्तमान परिस्थितियों में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और राज्य सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation से जांच कराने की मांग दोहराई। उल्लेखनीय है कि टिहरी गढ़वाल के लंबगांव क्षेत्र के देवल गांव में 18 वर्षीय दलित युवक केतन लाल की हत्या के बाद प्रदेशभर में आक्रोश का माहौल है। इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों ने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। चंद्रशेखर आजाद के देवल गांव पहुंचने और पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद यह मामला अब राज्य की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में संसद और अन्य संवैधानिक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में मानसून सक्रिय, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट; बागेश्वर में 1 जुलाई को स्कूल बंद उत्तराखंड में मानसून का असर तेज, देहरादून और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट, भारी बारिश की चेतावनी