हरिद्वार दौरा: पतंजलि पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री धामी, हुआ भव्य स्वागत
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हरिद्वार। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami शनिवार को हरिद्वार दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, अंगदान के प्रति जनजागरूकता और आयुर्वेद आधारित चिकित्सा व्यवस्था को सशक्त बनाने से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। इस दौरान दोनों नेताओं ने हरिद्वार स्थित Dev Sanskriti Vishwavidyalaya और Patanjali Yogpeeth का दौरा किया।

दौरे की शुरुआत शांतिकुंज में आयोजित ‘दधीचि अंगदान संकल्प अभियान’ की राष्ट्रीय संगोष्ठी से हुई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने शांतिकुंज स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की और अखंड ज्योति के दर्शन कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दान और त्याग की परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने महर्षि दधीचि के अस्थि दान का उल्लेख करते हुए कहा कि अंगदान मानवता की सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है, क्योंकि एक व्यक्ति का निर्णय कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने लोगों से अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश में अंगदान को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लाखों लोग अंगदान का संकल्प ले चुके हैं और सरकार इस दिशा में जागरूकता, पारदर्शिता और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने अंगदान को वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे अनेक गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।

इसके बाद दोनों नेता पतंजलि योगपीठ पहुंचे, जहां योगगुरु Baba Ramdev और Acharya Balkrishna ने उनका पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया। पतंजलि में आयोजित बैठक के दौरान उत्तराखंड में स्वास्थ्य अवसंरचना को और मजबूत बनाने, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के साथ जोड़ने तथा दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उत्तराखंड को स्वास्थ्य, योग और आयुर्वेद की वैश्विक राजधानी के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के समन्वय से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं।

हरिद्वार का यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक ओर अंगदान जैसे सामाजिक और मानवीय विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं, आयुर्वेद और योग आधारित चिकित्सा प्रणाली को नई गति देने के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को भी मजबूती मिली।