हरिद्वार में हीटवेव के चलते स्कूलों के समय में बदलाव, 27 अप्रैल से लागू होंगी नई समय-सारणी
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हरिद्वार | उत्तराखंड में लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव की स्थिति ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। विशेषकर मैदानी जिलों में दिन के समय तेज धूप और लू के चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में हरिद्वार जनपद में जिला प्रशासन ने एक अहम और जनहितकारी निर्णय लेते हुए स्कूलों के समय में अस्थायी बदलाव लागू कर दिया है। यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और उनकी दैनिक दिनचर्या को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह नई व्यवस्था 27 अप्रैल 2026 से 26 मई 2026 तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन का मानना है कि इस अवधि में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना है और दोपहर के समय लू का असर बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव को एक आवश्यक कदम माना जा रहा है, जिससे बच्चों को भीषण गर्मी से बचाया जा सके।

हरिद्वार जनपद में पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। सुबह के समय जहां गर्मी थोड़ी कम महसूस होती है, वहीं जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ता है, धूप तेज होती जाती है और दोपहर के समय लू जैसी स्थिति बन जाती है। इस कारण विद्यालय जाने वाले छोटे बच्चों से लेकर माध्यमिक और उच्च कक्षा के छात्रों तक सभी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कई अभिभावकों ने भी प्रशासन से समय परिवर्तन की मांग की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।

नई समय-सारणी के अनुसार अब प्री-प्राइमरी से कक्षा 5 तक के सभी विद्यालय प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक संचालित होंगे। वहीं कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूल का समय प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस बदलाव से यह सुनिश्चित किया गया है कि बच्चे दिन के सबसे गर्म समय से पहले ही अपने घर लौट सकें और तेज धूप व लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।

प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य केवल समय बदलना नहीं है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। जिलाधिकारी ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को निर्देशित किया है कि वे इस नई समय-सारणी का सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी, अशासकीय और निजी सभी विद्यालयों पर यह नियम समान रूप से लागू रहेगा।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे सभी विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं। इसमें स्वच्छ और ठंडे पेयजल की व्यवस्था, नियमित अंतराल पर वॉटर बेल बजाना, कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन और हवा के प्रवाह की व्यवस्था शामिल है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी स्कूल में बच्चों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

इसके अलावा प्रशासन ने यह भी निर्देश जारी किए हैं कि सभी विद्यालयों में ओआरएस घोल और प्राथमिक उपचार किट की उपलब्धता अनिवार्य रूप से रखी जाए। किसी भी बच्चे को यदि गर्मी या लू से संबंधित कोई परेशानी होती है, तो उसे तुरंत प्राथमिक उपचार दिया जा सके और आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जा सके।

इस निर्णय के साथ ही बच्चों को हीटवेव के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को गर्मी से बचाव के उपायों की जानकारी दें। जैसे पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, धूप में सीधे बाहर न निकलना, हल्के और ढीले कपड़े पहनना और शरीर में पानी की कमी न होने देना। बच्चों को यह भी बताया जाएगा कि लू लगने के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।

प्रशासन ने खेलकूद और बाहरी गतिविधियों पर भी विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब दोपहर के समय होने वाली किसी भी प्रकार की आउटडोर गतिविधि पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। स्कूलों को कहा गया है कि वे खेल गतिविधियों को केवल सुबह के शुरुआती घंटों में ही सीमित रखें, ताकि बच्चों को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके।

एक और महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया गया है कि स्कूलों की छुट्टी के समय बच्चों को एक साथ समूह में घर भेजा जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में बच्चों की निगरानी आसान रहे और वे सुरक्षित रूप से अपने घर पहुंच सकें। इसके साथ ही अभिभावकों को भी समय-समय पर सूचित करने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

हरिद्वार जिला प्रशासन का यह कदम अभिभावकों के बीच भी राहत की भावना लेकर आया है। कई अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए इतनी तेज गर्मी में स्कूल जाना काफी कठिन हो गया था। अब समय परिवर्तन से बच्चों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा और उन्हें राहत मिलेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि हीटवेव के दौरान बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, कमजोरी और लू लगने जैसी समस्याएं इस मौसम में आम हो जाती हैं। ऐसे में स्कूलों के समय में बदलाव एक वैज्ञानिक और आवश्यक निर्णय है, जिससे बच्चों को संभावित खतरे से बचाया जा सकता है।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। दिन के समय पारा सामान्य से कई डिग्री ऊपर जा सकता है और लू चलने की स्थिति बनी रह सकती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा पहले से उठाया गया यह कदम एक सतर्क और जिम्मेदार निर्णय माना जा रहा है।

शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति, स्वास्थ्य स्थिति और सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाएगी।

कुल मिलाकर हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय केवल एक समय परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति एक गंभीर और संवेदनशील पहल है। भीषण गर्मी और हीटवेव के इस दौर में यह कदम न केवल बच्चों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी एक संतोषजनक व्यवस्था साबित हो रहा है।

आने वाले दिनों में यदि तापमान और अधिक बढ़ता है, तो प्रशासन द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल यह निर्णय बच्चों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मजबूत और समयोचित कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।